पुराना गठिया दर्द करे ठीक:सिद्ध गठियावात नाशक कल्पयोग
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सिद्ध गठिया रोग नाशक योग

गठिया (संधिवात) की अयुर्वेदिक दवा
            (यूरिक एसिड में रामबाण)

सिद्ध गठिया रोग नाशक योग


सेवन विधि
1 चम्मच वातदर्द निवारण चुर्ण
चद्रप्रभा: 1 वटी
योगराज गूगल:1 वटी
सिंहनाद गूगल:1 वटी

यह एक समय की खुराक है।सुबह शाम खाने से 30 मिनट बाद ताजे पानी से सेवन कर 200 ग्राम दूध ले। यूरिक एसिड में दूध न ले।

लाभ :गठिया, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, घुटनों
के दर्द, शरीर दर्द, पुराने जोड़ो के दर्द में लाभदायक।

नोटः जरूरत मुताबिक गोली औऱ रस बदले जा सकते हैं।


     ESR बढ़ा हो तो यह दवा रामबाण है। 6 महीने दवा लगातार दवा करे।100% लाभ होगा।
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सिद्ध गठियावात नाशक क्ल्पचुर्ण घटक

पुराना गठिया दर्द करे ठीक:सिद्ध गठियावात नाशक कल्पयोग

⏯️ हरसिंगार 250 ग्राम
⏯️ त्रिफला 250 ग्राम
⏯️ इन्द्रयाण अजवाइन 125 ग्राम
⏯️ गिलोय चूर्ण- 100 ग्राम
⏯️ मैथी दाना -100 ग्राम
⏯️ अजवायन -100ग्राम
⏯️ चरायता -100 ग्राम
⏯️ सहजन छाल-100ग्राम
⏯️ काली जीरी 50 ग्राम
⏯️  कड़ु – 50 ग्राम
⏯️ सुरजन जीरी -50 ग्राम
⏯️ हारसिंगार के पत्ते -50 ग्राम
⏯️ नागौरी असगन्ध -50ग्राम
⏯️ सौंठ -50 ग्राम
⏯️ अलसी बीज -50 ग्राम

पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड,  सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी,लोंग, दारूहल्‍द , गोखुरू, खरैटी,  शतावरी,इंद्रायाण लाल, मीठा,शिलाजीत, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 10-10ग्राम।

⏯️ योगराज गुग्‍गल 400 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।
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दवा का सेवन कैसे करें
➡️ 2 से 3 ग्राम दिन में 3 बार दूध के साथ सेवन करें
साथ यह काढ़ा जरूर शामिल कीजिए
➡️असगंधरिषट+महारास्नादि काढा और दशमूलारिष्टा 2-2 चम्मच मिलाकर 3 बार लें ।

नोटः सिद्ध गिलोय काढ़ा भी आप गाठिया रोग में लगातार इस्तेमाल कर सकते। गिलोय का काढ़ा कैसे बनाएं आप यह लिंकः देख सकते हैं –https://bit.ly/2WHCDQE
कब तक सेवन करना चाहिए

➡️ यूरिक एसिड के लिए 21 से 45 दिन तक गठिया में 90 दिन से 180 दिन तक सेवन करें ।
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सिद्ध अयुर्वेदिक गठिया वात रोग गरंटी से करता है।

आयुर्वेद की भाषा मे  यह बीमारी   “आमवात” कहलाती है। सर्वप्रथ शरीर का विधिवत शोधन किया जाए तब जाकर ऐसी स्थिति बनेगी कि उन्हें दवाएं असर करेंगी। इस लिये इस क्रम में उन्हें निम्न उपचार दें—-

1  सिद्ध कब्जहर कल्पचुर्ण दिन में 1 बार दें, खाली पेट न दें। इससे उन्हें दस्त होंगे और देह में संचित विषपदार्थ मल के द्वारा निकल जाएंगे। दस्तों से घबराने की आवश्यकता नहीं है किन्तु यदि अधिक हों तो मात्रा कम कर दें।

इस चूर्ण को एक सप्ताह में 3 बार लेकर बंद कर दें इसके बाद नीचे लिखी दवा का तीन दिन बाद सेवन कराएं।

2 एरण्ड तेल दो चम्मच + रास्नासप्तक क्वाथ दो चम्मच मिला कर दिन में दो बार दें । इसे भी खाली पेट न दें और एक सप्ताह तक देने के बाद बंद कर दें जैसे कि ऊपर की दवा बंद करी हैं।

3.  सिद्ध गिलोय काढ़ा दिन में 3 बार गर्म कर ले।

4. वातारि गुग्गुलु एक गोली + आमवातारि रस दो गोली + महायोगराज गुग्गुलु दो गोली + वातगजांकुश रस एक गोली को रास्नादि क्वाथ के दो चम्मच के साथ दिन में तीन बार दें।

६ . समीर गज केशरी रस एक गोली + अश्वगंधादि गुग्गुलु दो गोली दिन में तीन बार अदरख के रस तथा शहद को मिला कर निगलवाएं।

5. सिद्ध दर्द निवारक तेल से मालिश करवाएं और फिर ऊपर से कपड़ा लपेट दें ताकि हवा न लग पाए।

गर्म जल, बाजरा, मूंग, जौ, करेला, परवल, तोरई, लहसुन,प्याज, हींग, सोंठ, गोमूत्र, मूली, एरण्ड का तेल, दूध का सेवन कराएं। गुड़ , अधिक जागना, बासी व गरिष्ठ भोजन, मांस, मछली,मल-मूत्र के वेग को रोकना, उड़द का सेवन न करें। दवाओं का सेवन कम से कम छह मास से साल भर तक कराएं जल्दबाजी न करें।

भोजन एवं परहेज:

पथ्य:

1. सबसे पहले किसी संस्थान में चिकित्सक की देख-रेख में 2-3 दिनों तक उपवास करना चाहिए।

2. आर्थराइटिस के रोगी के भोजन में वसा, प्रोटीन और नमक कम होना चाहिए।

3. कभी-कभार क्रीम निकला दूध, अन्न, फल, सब्जियों का सलाद का सेवन करना चाहिए।

4. रसदार फलों का और उन फलों का रस ज्यादा मात्रा में लें, जिनमें विटामिन `सी´ शामिल है। ऐसा करने से रोगी की प्रतिरोधक क्षमता में ही सुधार नहीं होता बल्कि जोड़ों और ऊतकों की रक्षा करने वाली प्रणाली भी मजबूत होती है।

5. आर्थराइटिस के रोगी को ज्यादा से ज्यादा फलों, सब्जियों और सलाद का सेवन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे रक्त की क्षारिता में ही वृद्धि नहीं होती बल्कि इन चीजों में पोटैशियम भी काफी होता है, जो एक ऐसा खनिज पदार्थ है जिससे ज्यादा मात्रा में नमक सेवन करने के कारण शरीर में जमा हो जाने वाले द्रवों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है।

अपथ्य:

1. आर्थराइटिस से पीड़ित रोगी को दूध, दही और छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. तली हुई चीजों, मक्खन, डिब्बा बंद पनीर, मलाई वाला दूध, मांसाहारी भोजन, अधिकांश मेवे, केक, पेस्ट्रियों और चीनी को सेवन नहीं करना चाहिए।

3. ऐल्कोहल, काफी, चाय और धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।

5. विशेष गाउटी आर्थराइटिस के रोगियों के उच्च प्रोटीनयुक्त भोजन, विशेषकर मांसाहारी भोजन, पालक, खूब, फूलगोभी, दाल और मटर आदि का सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिए।

नोट ➡️  खूद दवा तैयार करें । हम आपके साथ रहेंगे ।दवा शुरू कर हमे काल जरूर करते रहे । हम आप का ह्रदय से साथ देगे ।

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