लकोरिया (सफ़ेद पानी) के रोगों का अयुर्वेदिक समाधान- सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचूर्ण
ID: 2330

         सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा

ID: 2300

धातू पुष्टि कल्पचुर्ण

यह योग online मंगवाने के लिए आप जी whats मैसिज कर सकते हैं whats 94178 62263

सफ़ेद पानी औऱ ज्यादे पीरियड की समस्या के लिए यह योग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह योग इंफेक्शन और गर्मी को जड़ से ठीक करता है। लकोरिया  रोग का कारण गर्मी और योनि इंफेक्शन ही माना जाता है।

ल्‍यूकोरिया के कारण

ल्‍यूकोरिया से अविवाहित यु‍वतियों को भी सामना करना पड़ता। इस रोग का मुख्‍य कारण पोषण की कमी और योनि के अंदर ‘ट्रिकोमोन्‍स वेगिनेल्‍स’ नामक बैक्‍टीरिया की मौजूदगी है। इसके अलावा योनि की अस्वच्छता, खून की कमी, गलत तरीके से सेक्‍स, अत्यधिक उपवास, बहुत अधिक श्रम, तीखे, तेज मसालेदार और तले हुए खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, योनि या गर्भाशय के मुख पर छाले, बार-बार गर्भपात होना या कराना, मूत्र स्थान में संक्रमण, शरीर की कमजोर रोगप्रतिरोधक क्षमता और डायबिटीज के कारण योनि में सामान्यतः फंगल यीस्ट नामक संक्रामक रोग के कारण यह समस्‍या होती है।

श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया या “सफेद पानी आना” स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।

लकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्‍यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।

ल्‍यूकोरिया के सामान्य लक्षण

ल्‍यूकोरिया के सामान्‍य लक्षणों में कमजोरी का अनुभव, हाथ-पैरों और कमर-पेट-पेडू में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, भूख न लगना, शौच साफ न होना, बार-बार यूरीन, पेट में भारीपन, जी मिचलाना, योनि में खुजली आदि शामिल है। मासिक धर्म से पहले, या बाद में सफेद चिपचिपा स्राव होना इस रोग के लक्ष्ण हैं। इससे रोगी का चेहरा पीला हो जाता है। इसके अलावा स्थिति तब और भी कष्टपूर्ण बन जाती हैं जब धीरे-धीरे जवान महिला भी इस समस्‍या के कारण ढलती उम्र की दिखाई देने लगती है।

ल्‍यूकोरिया के प्रकार

ल्यूकोरिया सामान्यत: पांच प्रकार का होता है। पहला साधारण, जो पीरियड्स के साथ आता है और चला जाता है। दूसरा, यौन संबंध से होने वाला इंफेक्शन के कारण होता है। तीसरा बच्चेदानी के अंदर दाना होने के कारण होता है। चौथा बच्चेदानी के कैंसर के कारण होता है और पाचवां बच्चेदानी के निकाल जाने के बाद बच्‍चेदानी के मुंह में होनेवाली लाली की वजह से होता है।

लकोरिया की अयुर्वेदिक  दवा सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचूर्ण बहुत अच्छे से तैयार की जाती है। 

⬇️

कौंचबीज बीज 100 ग्राम,आवला चुर्ण 100 ग्राम,तुलसी बीज  100 ग्राम,कीकर फली  100 ग्राम,सतावरी 100 ग्राम,सफेद मूसली 100 ग्राम,मिश्री  100 ग्राम,बड़ दूध  50 ग्राम,मुलहठी  50 ग्राम,छोटी इलायची के बीज 25 ग्राम 3 महत्वपूर्ण भस्मो को मिलाकर चुर्ण बनाया जाता है। 200 ग्राम ब्रह्मिबुटी के काढ़े में भावना दी जाती है।

कैसे सेवन करे।

दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले। कम से कम 21 से 90 दिन तक का  कोर्स करे।अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 3 से 6 महीने का कोर्स करे।

साथ मे यह जरूर करे 

नीम पत्ती 200 ग्राम 10 ग्राम फिटकरी को 2 लीटर में उबालकर और फिर ठंडा होने पर 20 ग्राम डेटोल मिक्स कर ले और बोतल में भर ले।

दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे या योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।

सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें।यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें। सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें। अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।

लिकोरिया में खान-पान और परहेज

खःटी ,तली और गर्म वस्तु बिल्कुल बंद कर दे। दूध का अगर सेवन करना है तो मिश्री डाल कर उपयोग करे।

आहार कारक leucorrhea में एक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। आहार खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, फलों और डेयरी उत्पाद का सेवन भी मददगार है। मुख्य रूप से फल और सब्जियों विशेष रूप से केला, क्रैनबेरी, नारंगी, नींबू, काले प्लम, भिन्डी, पत्तेदार साग, प्याज, भूरा चावल, दही, साथ ही जड़ी-बूटियों और मसालों जैसे अदरक, लहसुन, मेथी और धनिया आदि खाने चाहिए। दैनिक आधार पर एक या दो पके केले खाएं। ताज़ा क्रैनबेरी रस का एक गिलास पियें। 

बहुत से खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें नहीं खाना चाहिए जैसे अंडे, मांस, रोटी, मशरूम, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं जिन्हें किण्वित किया गया है।

लकोरिया रोग में कुछ घरेलू योग भी सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचूर्ण के साथ जरूर अपनाएँ

ल्यूकोरिया का सबसे बड़ा कारण ठीक से सफाई न होना है। अत: योनि की सफाई और उसे सूखा रखना बेहद जरूरी है, अन्यथा संक्रमण फैलने से यह समस्या हो सकती है।

मासिक धर्म के समय भी सफाई का विशेष ध्यान रखें। हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलते रहें और हल्के गर्म पानी से योनि मार्ग की सफाई करें, ताके कीटाणु न रहें। सूती अंतर्वस्त्रों का प्रयोग करें और दिन में दो बार अंतर्वस्त्रों को बदलें। 

 कमजोरी के कारण भी ल्यूकोरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं, अत: अपने आहार पर विशेष ध्यान दें। पर्याप्त पोषण युक्त चीजों का सेवन करें और स्वस्थ रहने का प्रयास करें।

 शरीर में खून की कमी भी ल्यूकोरिया का कारण बन सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करें, ताकि हीमोग्लोबिन का स्तर कम न हो।

 रात को पानी में अंजीर भिगोकर रखें और सुबह गुनगुने पानी में इसे पीसकर खाली पेट सेवन करें। इसके अलावा रोजाना केले का सेवन भी इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार है।

खाना खाने के बाद 1 केला और मिश्री युक्त दूध इस्तेमाल करे।

1 चम्मच प्याज का रस शहद में मिलाकर सेवन करें। इस उपाय को रोज इस्तेमाल करें। इससे काफी राहत मिलेगी।

1 चम्मच आंवला पाउडर दो चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करें। इससे ल्यूकोरिया की समस्या दूर होगी। 

गुलाब के पत्तों को पीसकर दिन में दो बार आधा चम्मच दूध के साथ सेवन करें। 

ल्यूकोरिया की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भुने हुए चने भी काफी लाभदायक है। रोज भुने हुए चनों का सेवन करें।

1 चम्मच शहद में एक चम्मम तुलसी का रस मिलाकर पिएं। इससे भी ल्यूकोरिया की प्रॉबल्म दूर होती है।

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचूर्ण मूल्य 1050 रु वजन 400 ग्राम साथ मे 250 रु में 120 धातु पुष्टि गोली भी भेजी जााएगी। यह दवा 30 दिन की होगी।

दवा online मंगवा सकते हैं।किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए contact करे।

Whats 78890 53063/ 94178 62263

Email-sidhayurveda1@gmail.com

ID: 1788

Add Comment