सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण- मंदाग्नि के 103 रोगों में कारगर
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   सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

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    मंदाग्नि के103 रोगों की आयुर्वेदिक दवा

पाचन तंत्र की मजबूती ,भूख न लगे,पित्त वायु,अपेंडिक्स में रामबाण है। भारतीय ऋषियों की अयुर्वेदिक खोज पर आधारित। जो गिलोय रस में तैयार होता है 

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एक बात सदा ध्यान रखना कि मानसिक तनाव, चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान पान आदि आपके पाचन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।

अगर पाचन खराब हुआ तो गैस, कब्ज, जलन और मंदाग्नि सदा के लिए आप बिमार रख सकती है। इस लिए भारती ऋषियों ने ऐसी बीमारियों के लिए सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण की जड़ी बूटियों की खोज की थी ता जो मानवीय जीवन सदा निरोगी रहे।

इस लिए सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण गैस और कब्ज और वपेट के समस्त रोगों में लिये सर्वश्रेष्ठ दवा मानी जाती है।

आयुर्वेद अनुसार सभी रोग पेट के साफ न होने के कारण ही होते है । पेट साफ नही होगा तो बीमारी शरीर को जकड़ लेती हैं।आयुर्वेद में कहा भी गया है कि स्वस्थ रहने का रास्ता पेट से होकर जाता है |

आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में गैस्ट्रिक और कब्ज एक आम समस्या हो गई है जो हर घर में देखने को मिलती है । जिस कारण ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, दिल की बीमारियां, सांस की समस्या, आलस, बेचैनी, नर्वस सिस्टम, जैसी बीमारियों से शरीर जकड़ा रहता है और एलोपैथी दवा खा -खा शरीर को सदा के लिए रोग लगा लेता है।

आयुर्वेद अनुसार सिद्ध पाचन चुर्ण आप को औऱ आपके  परिवार को इन सभी रोगों से मुक्ति दिलवा सकता है क्योंकि यह पेट की मंदाग्नि तेज कर रोगों को नष्ट कर देता है।

विधि अनुसार सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण रोज या दूसरे दिन रात आधा चम्मच जरूर ले।  गैस बन गई हैं तो एक चुटकी मात्र चूसे  इस से 1 मिनट में जलन गैस समाप्त हो जाती है।

सिद्ध पाचन चूर्ण बनाने की विधि 

     सिद्ध  पाचन चूर्ण बनाने के लिए हमें – 

त्रिफला                ~2 kg

बेल चुर्ण               ~ 1kg

ब्रह्मी बूटी              ~ 500 ग्राम

संखपुष्पी               ~200 ग्राम

हिंग                      ~ 100 ग्राम

कालीमिर्च             ~ 200 ग्राम

अजवायन             ~ 400 ग्राम

दालचीनी             ~ 200 ग्राम

छोटी हरेड             ~ 200 ग्राम

शुद्ध सज्जीखार     ~ 100 ग्राम

सैंधा नमक            ~ 50 ग्राम

नसादर                      100 ग्राम

काला नमक।                50 ग्राम

सौंफ भुनी             ~ 100 ग्राम

पिपली छोटी              100 ग्राम

सोंठ                         100 ग्राम

पुदीना सत             ~ 10ग्राम

निम्बू सत               ~ 10 ग्राम  

मीठा सोडा             ~300 ग्राम

1लीटर गिलोय रस में भावना जरूर दे। तभी यह पेट की हर इंफेसन को दूर करेगी। गिलोय रस के बिना योग काम नही करता।

अगर निम्बू औऱ पुदीना सत न मिले तो 20 ग्राम निम्बू रस में सभी चुर्ण को मिलाकर सायं में सुखाए।

 इनको अच्छी तरह छान कर कर  साफ़ एवं (Air Tight ) मजबूत डक्कन वाली शीशी में भर ले।

मात्रा और सेवन विधि —

एक एक चम्मच चूर्ण खाने के 10 मिनट बाद गर्म या ताजे से पानी से करे इस्तेमाल। रात को दूध के साथ ले सकते हैं। जिस के सेवन से सुबह पेट साफ होगा।

बच्चों को कब्ज की या पेट दर्द की शकायत में चमच्च का 1/4 भाग गर्म पानी से दे।

1 से 6 महीने के बच्चों को एक चुटकी चटाएं। या 1 चुटकी चूर्ण को 20 ग्राम पानी में उबालकर चम्मच से बच्चों को पिलाएँ।

       सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण के लाभ 

अलग अलग पेट की बीमारी में अलग अलग तरीके करे इस्तेमाल।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण मंदाग्नि, अरुचि, भूख न लगना आदि पर विशेष लाभकारी। मात्रा 3 से 5 ग्राम भोजन के पश्चात या पूर्व। थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण के इस्तेमाल से पेट की सभी समस्याओं से मिलेगा सदा के लिए छुटकारा और कब्ज, गैस, अपच, जलन ,बी.पी और हिर्दय की होने वाली तेज गति में राहत मिलेगी।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण अम्लपित्त की सर्वोत्तम दवा है । छाती और गले की जलन, खट्टी डकारें, कब्जियत आदि पित्त रोगों के सभी उपद्रव इसमें शांत होते हैं। मात्रा 3 से 6 ग्राम भोजन के साथ।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण पौष्टिक, पित्त नाशक व रसायन है। नियमित सेवन से शरीर व इन्द्रियां दृढ़ होती हैं। मात्रा 3 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण उल्टी होना, हाथ, पांव और आंखों में जलन होना, अरुचि व मंदाग्नि में लाभदायक तथा प्यास नाशक है। मात्रा 1 से 3 ग्राम शहद से।

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण अतिसार, पतले दस्त, संग्रहणी, पेचिश के दस्त आदि में। मात्रा 1 से 3 ग्राम चावल का पानी या शहद से दिन में तीन बार।

यह चूर्ण वायु तथा मंदाग्नि के सभी प्रकार के रोगों को दूर करता है ।इसके सेवन से पेट की अग्नि ठीक होती है । अपान वायु बहार निकल जाती है

कब्ज को भी जड़ से दूर करने में सक्षम है ।

 सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण चूर्ण  वायु, अजीर्ण, कब्ज, आफरा, हिचकी, वमन (उल्टी), अरुचि, शुल (Colic), हैजा और कृमि आदि रोग नष्ट करता है। 

यह चूर्ण यकृत पित्त को सबल बनाता है, आमका पचन करता है; पेट में संगृहीत वायु को बाहर निकालता है, किटाणुओं को नष्ट कर पेट में उत्पन्न होने वाली दुर्गंध को दूर करता है तथा शौचशुद्धि कराने में सहायता पहुंचाता है। 

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

आहार में रेशेदार फल और सब्जियाँ जैसे सेब, संतरे, ब्रोकोली, बेरियाँ, नाशपाती, मटर, अंजीर, गाजर और फलियाँ आदि शामिल करें।

साबुत अनाज जैसे भूरे चावल, ज्वार, बाजरा, मेवे, गिरियाँ, और मछली, दालें, मसूर दाल, चावल और सोया के उत्पादों का प्रयोग बढ़ाएँ।

पानी मिला फलों का रस, प्राकृतिक पदार्थों से उत्पन्न सब्जियाँ, और औषधीय चाय पियें।

बीज सहित अमरुद और बेल का फल आँतों को व्यवस्थित करता है, और आहार में रेशे की मात्रा बढ़ाता है, ताकि कब्ज से राहत मिल सके। फल जैसे कि केले, आलूबुखारे, अंगूर और पपीता भी इसमें सहायक होते हैं।

इनसे परहेज करे

अधिक शक्कर उत्सर्जित करने वाले आहार जैसे रिफाइंड अनाज, शक्कर की गोलियाँ, केक और बिस्कुट आदि से परहेज। रेड मीट, डेरी आहार, और अंडे।कॉफ़ी, चाय और शक्करयुक्त कार्बन वाले पेय।

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