सिद्ध लिवर कल्पचूर्ण- लिवर की सभी बीमारियों में लाभदायक
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               सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

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लिवर के सभी रोगों और  लिवर की सभी इंफेक्शन में कारगर

?सिद्ध लिवर कल्पचूर्ण में कुछ विशेष निर्देश?

☑️ शराब से खराब हुए लिवर इस चुर्ण को नीम्बू पानी से इस्तेमाल करे।

☑️ काला पीलिया में करे 90 दिन का  कोर्स ।

☑️पीलिया रोग(जॉन्डिस) 2 दिन में आराम ।

    ?लिवर कल्पचूर्ण के अनंत फायदे?

☑️मुँह की बदबू,भुख की कमी ,बढ़े लिवर, फेंटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, यूरिक एसिड में,पाचन, दर्द पीलिया,शरीरक कमजोरी में कारगर औषधि।

☑️ इसके इलावा पेट की सूजन,आंत सूजन और लिवर सूजन एक दम ठीक करेगा आंतो में भरे पानी को भी स्वस्थ करेगा ।

☑️  सुबह पेट साफ ओर सभी पेट की बीमारी    ठीक होगी

☑️ एक दम हल्का महसूस होगा।

☑️ खून साफ औऱ शुद्ध होने लगेगा

☑️ लिवर इन्फ़ेक्सन SGOT का इलाज है

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण में डाले जाने वाली अयुर्वेदिक जड़ी बूटी सामग्री

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कुटकी          250 ग्राम

त्रिफला          100 ग्राम

भृंगराज चूर्ण   100 ग्राम

गिलोय           100 ग्राम

अजवायन      100 ग्राम

करेला चुर्ण     100 ग्राम

तुलसी पंचाग  100 ग्राम

सोंठ               50 ग्राम

अडूसा            50 ग्राम

पिपली छोटी    50 ग्राम

त्रिकुट             50 ग्राम

मुलहठी           20 ग्राम

 हल्दी              20 ग्राम

अतीस             20 ग्राम

चिरायता          20ग्राम

काला नमक     20 ग्राम

सेंधा नमक       20 ग्राम

पुनर्वा             20 ग्रा 

काशनी।          20 ग्रा 

भुई आँवला     20 ग्रा

दारुहल्दी         20 ग्रा

माई                5 ग्रा 

वायविडंग       5 g

5 महत्वपूर्ण भस्मो के साथ सभी जड़ी बूटियों को पीसकर चुर्ण बनाया जाता है। 500 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दी जाती है।

    सेवन विधि- सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण 

               कैसे इस्तेमाल करे

☑️  दिन में 3 बार 2 -2 ग्राम  पानी के साथ ले। दिन में 3 बार दवा ले। बच्चों को 1 ग्राम आधा चम्मच ही दे। 

लीवर की  बीमारी होने पर 90 दिन का कोर्स जरूर पूरा करे। पीलिया होने पर 21 दिन इस्तेमाल करे। अगर स्वस्थ हैं तो रात को 1 चमच्च पानी से  कभी कभी लेते रहे इस से आप का लिवर कभी खराब और बीमार नही होगा*

लिवर की सभी बीमारियां ठीक होगी। अगर आप कभी कभी इस चुर्ण को लेते हैं तो कभी लिवर की बीमारी नही होगी।

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नोट:- नही बना सकते तो online मंगवाए

          लिवर  की सूजन का कारण 

लीवर कमज़ोर होना या लीवर की खराबी, इस बिमारी के कई कारण हो सकते है। लीवर में दर्द होना, भूख कम लगना आदि इस बिमारी के सामान्य लक्षण है।

जिगर की सूजन का प्रमुख कारण भोजन को चबाए बिना निगल जाना, ठूंस-ठूंसकर तेल, मिर्च, मसालेदार पदार्थों तथा खट्टी, चटपटी चीजों का सेवन करना होता है| रात्रि का भोजन करने के बाद अधिक देर तक जागकर कार्य करने से भी जिगर में सूजन उत्पन्न हो सकती है| दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने से भी पाचन क्रिया विकृत होकर जिगर में सूजन का कारण बन जाती है| 

लिवर की खराबी का अगर सही समय पर इलाज़ न हो तो आगे जाकर यह बिमारी विकराल रूप ले सकती है, यहाँ तक की जान भी जा सकती है।

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके 

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          ? खराब लिवर के लक्षण?

☑️ स्वास का फूलना

☑️ यूरिक एसिड बढ़ना

☑️ कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना

☑️ पेट में सूजन आना.

☑️ शरीर में थकावट.

☑️ छाती में जलन होती है 

☑️ पेट मे भारीपन महेसुस होता है.

☑️ पेट में कब्ज,  गैस बनने की समस्या.

☑️ शरीर में आलसपन आना.

☑️ शरीर में कमजोरी आना.

☑️ लीवर बड़ा हो जाता है.

☑️ मुह का स्वाद ख़राब होता है.

इस रोग में जिगर में सूजन आ जाती है| वह शनै:-शनै: सिकुड़कर छोटा तथा कठोर हो जाता है| रोगी को अपच, उबकाई एवं वमन की शिकायत होने लगती है| भूख नहीं लगती| शरीर का वजन कम होने लगता है| पेट दर्द, त्वचा में पीलापन, हल्का ज्वर तथा शारीरिक और मानसिक थकावट के लक्षण प्रकट होने लगते हैं| पेट की नसें फूल जाती हैं| शरीर तथा चेहरे पर मकड़ी के जाले-से हल्के चिह्न दिखाई देने लगते हैं|

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके से नहीं पहुँच पाता और ठीक तरह से हज़म भी नहीं हो पाता। ठीक तरह से हज़म न हो पानें से अन्य तरीके के रोग भी उत्पन्न हो सकते है। इसलिए लीवर की खराबी का पक्का, आसान और पूरी तरह से आयुर्वेदिक इलाज़ हम आपके लिए लेकर आये है जिससे लिवर की खराबी से निजात मिल जाएगी।

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     ? इन उपायों को साथ इसके साथ करे ?

☑️ दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तेमाल न करें। चीनी के बजाय दूध में चार-पाँच मुनक्का डाल कर मीठा कर लें। रोटी भी कम खायें। अच्छा तो यह है कि जबै उपचार चलता रहे रोटी बिल्कुल न खाकर सब्जियाँ और फल से ही गुजारा कर लें।

☑️  सब्जी में मसाला न डालें। टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लौकी आदि शाक-सब्जियाँ और पपीता, ऑवला, करें।

☑️  धी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें। पन्द्रह दिन में जिगर ठीक हो जाएगा।

☑️ जिगर का संकोचन में दिन में दो बार प्याज खाते रहने से भी लाभ होता है।

☑️ जिगर रोगों में छाछ (हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर) दोपहर के भोजन के बाद सेवन करना बहुत लाभप्रद है।

☑️ आँवला का रस 25 ग्राम या सूखे ऑवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से 15-20 दिन में यकृत के सारे दोष हो जाते हैं।

☑️ एक सौ ग्राम पानी में आधा नीबू निचोडकर नमक (चीनी की जाय) डालें और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होगी। 

7  से 21 दिन लें।

☑️ जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम दिया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है। 
☑️ तिल्ली अथवा जिगर (यकृत) व तिल्ली (प्लीहा) दोनों के बढ़ने पर पुराना गुड़ डेढ़ ग्राम और बड़ी (पीली) हरड़  का चूर्ण बराबर वजन मिलाकर एक गोली बनायें और ऐसी गोली दिन में दो बार प्रातः सायं हल्के गर्म पानी के साथ एक महीने तक लें।

☑️ इससे यकृत (Liver) और प्लीहा (Spleen) यदि दोनों ही बढ़े हुए हों, तो भी ठीक हो जाते हैं। 

☑️ विशेष-इसके तीन दिन के प्रयोग से अम्लपित्त का भी नाश होता है।

?परहेज और आहार?

          लेने योग्य आहार

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सब्जियाँ,फलियाँ,ताजे फल,डेरी उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक वसा और तेल,अंडे,साबुत अनाज
परहेज- शक्कर का या अधिक शक्कर युक्त आहार। सोडा और सोडा युक्त फ्रूट पन्चेस।

संतृप्त वसा। शराब।

सिद्ध अयूर्वादिक -विश्वास का एक नाम है।

                संपर्क सूत्र

       Whats 78890 53063

ID: 1825

       Whats 94178 62263

https://www.sidhayurved.com/2018/02/blog-post_17.html?m=1

ID: 1791

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