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सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

1,550.00 1,260.00



सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण पुर्ण नुस्खा

त्रिफला – 250 ग्राम,
कुटकी 200 ग्राम,
हारसिंगार-200 ग्राम,
चरायता 100 ग्राम,
गिलोय-100,ग्राम,
शंखपुष्पी-100 ग्राम,
नीम चुर्ण-100 ग्राम,
अजवाइन -100 ग्राम,
गोरखमुण्डी-100 ग्राम
,तुलसी चुर्ण -100 ग्राम,
पित्तपापड़ा-100 ग्राम,
काकड़ासिंगी-100 ग्राम,
कलौंजी-100 ग्राम,कूठ-50 ग्राम,चित्रक -50 ग्राम,आम्बा हल्दी –50 ग्राम,अपामार्ग-50 ग्राम,महुआ छाल चुर्ण-50 ग्राम
3 महत्वपूर्ण भस्मो सहित सभी चुर्ण को 300 ग्राम एलोवेरा रस में भावना देकर  धूप में सूखा सुखाई जाती है।

 

सेवन विधि:-
दिन में 3 बार एक एक चम्मच पानी के साथ लेते रहे। बच्चों को आधी खुराक दे।

 

 पुराने रोग में 21 से 90  दिन उपयोग करे अगर रोग बहुत  पुराना हो तो 90 दिन का कोर्स जरूर करे या  जरूरत मुताबिक जब दवा करे जब तक रोग बिल्कुल ठीक न हो जाए।

 

परहेज खाज खूजली रोग में  बहुत जरूरी होता है। परहेज में तली ,खट्टी और आचार बिल्कुल बंद कर दे।
Category: Product ID: 2624

Description

ID: 2330
यह  योग भारती ऋषियों की अयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की खोज पर आधारित है जो-त्वचा के सभी रोगों को करे जड़ से खत्म करता है
नोटः- अगर जख्म न भरे और खाज खुजली से परेशानी है तो सिद्ध त्वचा  तेल कारगर हैं जख्म और खाज -खूजली को मात्र 2 दिन ही ठीक कर देता है। सिद्ध त्वचा तेल औऱ सिद्ध त्वचा कल्पचूर्ण एक साथ इस्तेमाल करने होते हैं।

 

हर्पिस की जलन, खाज, खुजली औऱ दर्द में कारगर है।किसी भी प्रकार की त्वचा इंफेक्शन के लिए 100%लाभदायक है।

 

हाथ पैर की उंगलियों का फटना,खुश्क चमड़ी ,धाफरी, शीतपित्त, सीतपित, पिती उछलना ये सभी एक ही बिमारी के नाम हैं जिसको अरटीकेरिया भी कहते हैं।  सभी का इलाज आप सिद्ध त्वचा कल्पचूर्ण और सिद्ध त्वचा तेल से ग्रंटी सहित इलाज कर सकते हैं।

 

साथ मे दाद, खाज ,खुजली,एक्जिमा औऱ सोरासिस की 100% कारगर दवा है  सिद्ध त्वचा कल्पचूर्ण ।

 

क्या आप दाज खाज खुजली से पेरशान है ? तो ये लेख आपके बहुत काम आएगी | आज के लेख में हम आपको दाज खाज खुजली इलाज के लिए कुछ घरेलू उपाय बताने जा रह है| अगर आप इन उपाय का प्रयोग करेगे तो आको सभी प्रकार के समस्यों से निजात मिल जायेगी |

 

खाज खुजली परेशान करने वाली बीमारी है।अगर हमारे शरीर में कहीं भी कुछ हलचल हो रही है या ऐसा लग रहा हो कि कुछ काट रहा है तो हम शरीर के उस हिस्सें को हाथों से रगड़ देते हैं तो हमें थोड़ी शान्ति मिलती है इसे ही खाज-खुजली कहते हैं। यह “सारकोप्टीस स्केवी´´ नाम के रोगाणु से फैलती है और यह मुख्यत: दो तरह की होती है- तर (गीली) और सूखी।

 

खाज खूजली के कारण :

 

  गर्मी के मौसम में शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आता है और जब यह पसीना त्वचा पर सूख जाता है तो खुजली पैदा हो जाती है। बाहर निकलने पर जब धूल-मिट्टी शरीर पर लगती है तो भी खुजली पैदा हो जाती है। रोजाना न नहाना भी खुजली होने का बहुत बड़ा कारण है। 
सर्दी के मौसम में ठंड़ी हवा जब शरीर में लगती है तो शरीर की त्वचा सूखकर खुरदरी सी हो जाती है और उसमें तेज खुजली होने लगती है ज्यादा जोर से खुजालने पर त्वचा में निशान से पड़ जाते हैं और उनमें तेज जलन होती है। 

 

खुजली एक फैलने वाला रोग है। घर के अन्दर अगर किसी एक व्यक्ति को खुजली हो जाती है तो उसके साथ वाले सारे लोग भी खुजली के शिकार हो जाते हैं। क्योंकि यह लाग की बीमारी होती है

 

दाद  के कारण

 

ये कई प्रकार क होते है और इसके होने के कई कारण हो सकते है जैसे गीले कपडे पहनने से , किसी दाद ग्रसित आदमी के संपर्क में आने से या पसीना जादा आने से

 

 खाज खुजली के लक्षण :

 

  खुजली बहुत तेजी से फैलने वाला त्वचा का रोग है। इस रोग में सबसे पहले शरीर में छोटी-छोटी फुंसिया निकल जाती है। यह फुंसिया हाथ-पैरो में, उंगलियों में, कलाई के पीछे के भाग में और बगल में ज्यादा निकलती है और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। यह अक्सर लाल रंग के निशान के रूप में दिखाई देती है। यह खराब चीजों को छूने से, गलत इंजैक्शन के लग जाने के कारण या संक्रमण होने के कारण हो जाती है।
ID: 1814

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