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सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण- पेट के हर रोग की दवा

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सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण

जब पेट की मंदाग्नि कमजोर पड़ जाती है तो शरीर पर 103 रोगों का होता हमला। जाने पूरी जानकारी।

        सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

मंदाग्नि के103 रोगों की आयुर्वेदिक दवा

      

पाचन तंत्र की मजबूती ,भूख न लगे,पित्त वायु,अपेंडिक्स में रामबाण है। भारतीय ऋषियों की अयुर्वेदिक खोज पर आधारित। जो गिलोय रस में तैयार होता है 

 

         
गिलोय बेल रस के अनंत फायदे जानने के लिये टच करे:- https://bit.ly/2WHCDQE

 

एक बात सदा ध्यान रखना कि मानसिक तनाव, चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान पान आदि आपके पाचन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।

 

अगर पाचन खराब हुआ तो गैस, कब्ज, जलन और मंदाग्नि सदा के लिए आप बिमार रख सकती है। इस लिए भारती ऋषियों ने ऐसी बीमारियों के लिए सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण की जड़ी बूटियों की खोज की थी ता जो मानवीय जीवन सदा निरोगी रहे।

 

इस लिए सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण गैस और कब्ज और वपेट के समस्त रोगों में लिये सर्वश्रेष्ठ दवा मानी जाती है।

 

आयुर्वेद अनुसार सभी रोग पेट के साफ न होने के कारण ही होते है । पेट साफ नही होगा तो बीमारी शरीर को जकड़ लेती हैं।आयुर्वेद में कहा भी गया है कि स्वस्थ रहने का रास्ता पेट से होकर जाता है |

 

आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में गैस्ट्रिक और कब्ज एक आम समस्या हो गई है जो हर घर में देखने को मिलती है । जिस कारण ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, दिल की बीमारियां, सांस की समस्या, आलस, बेचैनी, नर्वस सिस्टम, जैसी बीमारियों से शरीर जकड़ा रहता है और एलोपैथी दवा खा -खा शरीर को सदा के लिए रोग लगा लेता है।

 

आयुर्वेद अनुसार सिद्ध पाचन चुर्ण आप को औऱ आपके  परिवार को इन सभी रोगों से मुक्ति दिलवा सकता है क्योंकि यह पेट की मंदाग्नि तेज कर रोगों को नष्ट कर देता है।

 

विधि अनुसार सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण रोज या दूसरे दिन रात आधा चम्मच जरूर ले।  गैस बन गई हैं तो एक चुटकी मात्र चूसे  इस से 1 मिनट में जलन गैस समाप्त हो जाती है।

 

Description

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ID: 1791

सिद्ध पाचन कल्पचूर्ण बनाने की विधि 

     सिद्ध  पाचन चूर्ण बनाने के लिए हमें – 

 

त्रिफला                ~2 kg
बेल चुर्ण               ~ 1kg
ब्रह्मी बूटी              ~ 500 ग्राम
संखपुष्पी               ~200 ग्राम
हिंग                      ~ 100 ग्राम
कालीमिर्च             ~ 200 ग्राम
अजवायन             ~ 400 ग्राम
दालचीनी             ~ 200 ग्राम
छोटी हरेड             ~ 200 ग्राम
शुद्ध सज्जीखार     ~ 100 ग्राम
सैंधा नमक            ~ 50 ग्राम
नसादर                      100 ग्राम
काला नमक।                50 ग्राम
सौंफ भुनी             ~ 100 ग्राम
पिपली छोटी              100 ग्राम
सोंठ                         100 ग्राम
पुदीना सत             ~ 10ग्राम
निम्बू सत               ~ 10 ग्राम  
मीठा सोडा             ~300 ग्राम
1लीटर गिलोय रस में भावना जरूर दे। तभी यह पेट की हर इंफेसन को दूर करेगी। गिलोय रस के बिना योग काम नही करता।

 

अगर निम्बू औऱ पुदीना सत न मिले तो 20 ग्राम निम्बू रस में सभी चुर्ण को मिलाकर सायं में सुखाए।
 इनको अच्छी तरह छान कर कर  साफ़ एवं (Air Tight ) मजबूत डक्कन वाली शीशी में भर ले।

 

मात्रा और सेवन विधि
एक एक चम्मच चूर्ण खाने के 10 मिनट बाद गर्म या ताजे से पानी से करे इस्तेमाल। रात को दूध के साथ ले सकते हैं। जिस के सेवन से सुबह पेट साफ होगा।
बच्चों को कब्ज की या पेट दर्द की शकायत में चमच्च का 1/4 भाग गर्म पानी से दे।
1 से 6 महीने के बच्चों को एक चुटकी चटाएं। या 1 चुटकी चूर्ण को 20 ग्राम पानी में उबालकर चम्मच से बच्चों को पिलाएँ।

 

 

 

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