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सिद्ध बाजीकरण योग-मर्दाना ताक़त के लिए महाराजा योग

2,500.00

वीर्यवर्धक और शक्तिवर्धक के साथ निपुसंक रोग को करे जड़ से ठीक,बढ़ाए शक्राणु की संख्या,यह योग आप को निपुणता देगा,शरीर की हर कमजोरी को करेगा दरुस्त, शरीर की कमजोरी, दिमागी कमजोरी, नशों की कमजोरी, नर्वस सिस्टम कमजोरी, नज़र की कमजोरी,पेट की कमजोरी,खून न बनना और वीर्य की कमजोरी में 100%कारगर।

Description

ID: 2330

वीर्यवर्धक और शक्तिवर्धक के साथ निपुसंक रोग को करे जड़ से ठीक,बढ़ाए शक्राणु की संख्या,यह योग आप को निपुणता देगा,शरीर की हर कमजोरी को करेगा दरुस्त, शरीर की कमजोरी, दिमागी कमजोरी, नशों की कमजोरी, नर्वस सिस्टम कमजोरी, नज़र की कमजोरी,पेट की कमजोरी,खून न बनना और वीर्य की कमजोरी में 100%कारगर।

जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है।इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं।इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।

                                                               

                                                               

                                           नपुंसकता के कारण

नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है।ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।

     

नपुंसकता के लक्षण क्या है देखे

मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

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   सिद्ध बाजीकरण कल्पचुर्ण के फ़ायदे

☑️  बाजीकरण कल्पचुर्ण के प्रयोग से शुक्रानुओ में वृद्धि होती है इसका 90 दिन प्रयोग करें। इसको खाने से संतान की प्राप्ति हो सकती है।

☑️ यह योग 20 से 30 मिनट तक timing में ले जाता है।

☑️ सिद्ध बाजीकरण शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

  ☑️यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।

☑️ इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

☑️ धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

☑️ यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

☑️ यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।

☑️ दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

☑️ यह औरतों के संभोग करने की क्षमता को बढाता है. इसके इलावा  शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण पुरुषों की कामेक्षा बढाने के लिए भी असरदायक है. इन्फर्टिलिटी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, कमजोरी, लो स्पर्म काउंट और यूरिन की समस्या को दूर करने के लिए लाभकारी है।

                                                       परहेज :

1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।

★★★

                                                    सावधानी-

☑️ इसका उपचार करते समय लगभग 4-5 दिन तक स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए।

☑️ रात को सोते समय पानी में किशमिश के 6-7 दाने भिगोकर सुबह नाश्ते के समय पानी के साथ ही खा लें।

☑️ काले चनों का सूप बनाकर पिएं और उनको उबालकर खाना भी लाभकारी होता है।

☑️ अगर खाना चाहो तो बादाम की 8-10 गिरियों को भी खा सकते हैं।

☑️ मन को एकदम गलत विचारों से दूर रखें।

        ☑️ गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।

ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है! वीर्य गाड़ा हो sex timing को कुदरती बढ़ावा देगा।

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